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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में हम जानेंगे कि भारतीय संविधान में वर्णित मुल अधिकार क्या सभी व्यक्तियों को प्राप्त है ? भारतीय संविधान के 3 के अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 35 तक मूल अधिकारों का वर्णन किया गया है। ये सभी मूल अधिकार सभी भारतीय व्यक्तियों को उनके जन्म से प्राप्त हो जाते है। परन्तु कुछ अधिकार ऐसे भी है जो सभी व्यक्तियों को प्राप्त है , वो चाहे भारतीय हो या विदेशी व्यक्ति।
भारतीय संविधान के वे मुल अधिकार जो विदेशी व्यक्ति को भी प्राप्त है ?
भारतीय संविधान के वे मूल अधिकार जो सभी व्यक्तियों को प्राप्त है जिनमे विदेशी व्यक्ति भी शामिल है ?
भारतीय संविधान के इन मूल अधिकारों को विदेशी व्यक्ति को भी प्रदान करने का मुख्य कारण है कि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके , प्रत्येक व्यक्ति ये आशा करता है कि उसे कानून की समानता मिले और अन्य जो उसे प्रदान किये जाये। ऐसे ही कुछ अनुच्छेद है जो की विदेशी व्यक्ति को भी प्रदान किये गए ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो।
- अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समता और विधियों का सामान संरक्षण।
- अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि कके सम्बन्ध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 21 – प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
- अनुच्छेद 21 क – प्राथमिक शिक्षा का अधिकार।
- अनुच्छेद 22 – कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध से संरक्षण।
- अनुच्छेद 23 – मानव दुर्व्यापार और बलात श्रम का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 24 कारखानों आदि में 14 वर्ष से कम उम्र के बालकों के नियोजन का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28 – धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार।
वे मूल अधिकार जो केवल भारतीय को प्राप्त है न की विदेशी व्यक्ति को भी
- अनुच्छेद 15 – धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, या जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 16 – लोक नियोजन में अवसर की समता।
- अनुच्छेद 19 – वाक् स्वतंत्रता आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 20 – अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 30 – शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार।
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